संताल लिखेगी सरकार की कहानी

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  • झाविमो खोलेगी खाता, सारठ में बन रहे आसार
  • महागंठबंधन की बढ़ सकती हैं सीटें
  • सरकार बनाने में किंग मेकर होगा संताल परगना

संथाल परगना/संवाददाता: झारखंड विधानसभा के लिए हर चुनाव के माफिक इस चुनाव में भी संथाल परगना किंग मेकर बनेगा। पिछले चुनावों की तरफ गौर करें तो 2014 में संथाल परगना से भाजपा ने 6 सीटें ली थी। इस बार जो रुझान आया है उसमे भाजपा की सीटें कम हो सकती है। महागठबंधन व अन्य दलों ने इस बार भाजपा को संथाल परगना में कांटे की टक्कर दी है। ज्यादातर सीटों पर देखें तो जनता का रुझान भाजपा को छोड़कर महागठबंधन, आजसू झाविमो की ही तरफ रहा। आखरी चरण के चुनाव के बाद जनता का रुख भाजपा से मुड़ता दिख रहा है। यहां 18 सीटों में एक नाला विधानसभा को छोड़कर बाकी सभी भाजपा के प्रत्याशियों को महागठबंधन व आजसू ने कांटे की टक्कर दी है। देवघर, मधुपुर, राजमहल, महागामा, गोड्डा, दुमका और सारठ इन सभी सीटों पर भाजपा के प्रत्याशियों की चिंता बढ़ गई है।

कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो यहां इस बार महागठबंधन मजबूती के साथ पेश आने वाली है, जो कि झारखंड में सरकार बनने के लिए किंग मेकर साबित होगा। वैसे भी हर चुनाव में यही कहा जाता है झारखंड में सरकार का ढांचा संताल परगना ही तैयार करती है। इस बार भी संताल परगना की जनता ने सरकार का ढांचा लगभग तैयार कर दिया है। 81 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली एकमात्र पार्टी झारखंड विकास मोर्चा का खाता खुलने के आसार इस चुनाव में संथाल परगना से बन रहे हैं। सारठ में मंत्री रणधीर सिंह टक्कर देने के लिए झाविमो के प्रत्याशी चुन्ना सिंह ने पहले से ही अपना मैदान तैयार कर लिया था और इस मैदान में काफी हद तक चुन्ना सिंह खरे उतरे हैं।

वोटिंग का समीकरण अगर देखा जाए तो इस बार अगर आदिवासी वोट बैंक लेने में रणधीर सिंह थोड़े भी कमजोर पड़े होंगे तो वह तीसरे नंबर पर भी जा सकते हैं। क्योंकि आदिवासी का बड़ा वोट बैंक सारठ विधानसभा में है और झारखंड मुक्ति मोर्चा इसे अपना परंपरागत वोट बैंक मानती है। अगर आदिवासी इस परंपरा के तहत झामुमो को पसंद करती है तो फिर यहां झाविमो और झामुमो दोनों में टक्कर होगी। अगर आदिवासी झामुमो के अलावा किसी और तरफ गए हैं तो फिर परिणाम उल्टा भी हो सकता है।