आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने की प्रेसवार्ता

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  • आदिवासियों के जल ,जंगल जमीन को बचाने के लिए अनुसूचित क्षेत्रों में असंवैधानिक ढ़ंग से स्थापित पंचायत राज्य व्यवस्था और नगर पालिकाओं का भंग करना राज्यपाल की संवैधानिक बाध्यता

बरहरवा/संवाददाता: आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के तत्वावधान में मंगलवार को संसदीय कानून पीपेसा 1996 अर्थात पंचायतों के उपबंध अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार अधिनियम 1996 के क्रियान्वयन के लिए एक प्रेस वार्ता का आयोजन पतना प्रखंड में किया गया।

उपर्युक्त प्रेस वार्ता में मंच के राष्ट्रीय संयोजक विक्टर मालतो ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत राज्य व्यवस्था व नगर पालिकाओं के व्यवस्था पर संवैधानिक रोक है। फिर उसके बाद माननीय संसद ने विशेष कानून बना कर आदिवासियों से जुड़े व्यवस्थाओं को बरकरार रखने के लिए ही पीपेसा कानून 1996 का निर्माण कर उक्त कानून को अपवादों और उपांतरणो के अधीन विस्तार किया, क्योंकि कोई भी सामान्य कानून अनुसूचित क्षेत्रों में लागू नहीं होगा।

पीपेसा 1996 के धारा 4 में यह स्पष्ट उल्लेख है कि राज्य विधान मंडल इस कानून के विरुद्ध कोई भी नियमावली नहीं बनायेगा। इस कानून के धारा 4(0) में स्पष्ट कहा गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायतों के प्रशासनिक व्यवस्था को स्थापित करने के क्रम में संविधान के छठी अनुसूचित पैटर्न का अनुपालन किया जाएगा। यानी स्वशासी जिला परिषद का गठन किया जाना है। पुनः जिले के निचले स्तर में आदिवासी ग्राम सभा का स्थापना की जाएगी। जिसके पास सात विभिन्न शक्तियां रहेंगी जिसका विवरण उक्त कानून के धारा 4(एम) में उल्लेख है। क्योंकि अनुसूचित क्षेत्रो में उपर्युक्त कानून की अनदेखी हुई है यही कारण है कि जनजाति समाज में बेरोजगारी गरीबी भूखमरी अशिक्षा, पलायन, मानव तस्कर एवं शांति और स्वच्छ प्रशासन की समस्या उत्पन्न हुई है।

मौके पर ग्राम प्रधान सिदो हांसदा, शील हेम्ब्रम, सचिदा मरांडी, पालटन चोड़े, मनोज टुडू, विनय सोरेन, रमेश हेम्ब्रम, संटु टुडू, सोले मरांडी, सुभाषटेन हेम्ब्रम साइमन मुर्मू व अन्य थे।