धनबाद जिले के चासनाला खदान हादसे की 44वीं बरसी

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रांची/संवाददाता: 27 दिसम्बर 1975, विश्व के इतिहास का वो काला दिन, जिसमे काले कोयले के लिए 375 मजदूरों की जान खदान में अचानक आयी बाढ़ में गई। भारत के इतिहास के सबसे बडी़ खान दुर्घटना धनबाद से 20 किलोमीटर दूर चासनाला में घटी, सरकारी आँकडों के अनुसार लगभग 375 लोग मारे गये थे। कोल इंडिया के अंतर्गत आनेवाली भारत कोकिंग कोल लिमिटेड की चासनाला कोलियरी केपिट संख्या 1 और 2 के ठीक ऊपर स्थित एक बडे़ तलाब में जमा करीब पाँच करोड़ गैलन पानी, खदान की छत को तोड़ता हुआ अचानक अंदर घुस गया ओर इस प्रलयकालीन बाढ़ में वहां काम करे, सभी लोग फँस गये। आनन-फानन में मंगाये गये पानी निकालने वाले पम्प छोटे पड़ गये, कलकत्ता स्थित विभिन्न प्राइवेट कंपनियों से संपर्क साधा गया, तब तक काफीं समय बीत गया, फँसें लोगों को निकाला नहीं जा सका और कंपनी प्रबंधकों ने नोटिस बोर्ड में मारे गये लोग की लिस्ट लगा दी। चासनाला खदान हादसे को आज 44 साल हो गए।

बांध टूटने की वजह से हुई थी यह भीषण दुर्घटना, महीनों बाद कैप लेम्प के नम्बरों से हुई थी मृतकों की पहचान

चासनाला कोलियरी के डीप माइंस खदान रिसने वाले पानी को जमा करने के लिए यहां एक बांध बनाया गया था। अधिकारियों को हिदायत दी गयी थी कि बांध के 60 मिटर के आसपास किसी प्रकार की ब्लास्टिंग नहीं की जानी चाहिए। लेकिन अधिकारियों ने कोयला निकालने के चक्कर मे इन आदेशों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर हेवी बल्सस्टिंग कर दी जिसके बाद खदान में काम कर रहे सभी 375 मजदुर काल के गाल में समा गए थे। वहीं घटना के बाद मृतकों की सही प्रकार से पहचान नहीं हो पाई थी और न ही प्रबंधन के पास कोई आंकड़ा था। बाद में महीनों बाद खदान का पानी कम होने से खदान के अंदर सड़े गले शव के कपड़े और खदान में काम करते वक्त इस्तेमाल की जाने वाली कैप लेम्प से मृतकों की पहचान की गई थी।

झरिया शहीद स्मारक पर हर वर्ष होती है सर्वधर्म सभा, दोपहर 1:35 बजे आज भी बजता है सायरन

घटना के बाद प्रबंधन की ओर से शहीद खनिकों की याद में शहीद स्मारक का निर्माण कराया गया और सभी शहीदों के दाह संस्कार के लिए दर्जनों मौलाना, पादरी व पंडितों को बुलवाया और मृतकों के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया करवाई गयी थी। तब से आज तक हर वर्ष शहीद स्मारक के समीप सर्व धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाता है। शहीद बेदी पर प्रबंधन, मजदुर नेताओं व शहीदों के परिजनों द्वारा श्रधांजलि दी जाती है। घटना की याद ताजा करने के लिए आज भी हर वर्ष चासनाला खदान के ऊपर ठीक 1:35 बजे सायरन बजाकर घटना को याद किया जाता है।

यश चोपड़ा ने 1979 में बनाया था घटना पर आधारित फ़िल्म काला पत्थर

बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्देशक यश चोपड़ा ने पूरी घटना को फिल्माया था। फ़िल्म में बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, शशि कपूर, प्रेम चोपड़ा व अभिनेत्री राखी, परवीन बॉबी, नीतू सिंह ने प्रमुख किरदार निभाए थे। वहीं फ़िल्म की शूटिंग भी झरीया के खदानों में हुई थी। इस दौरान इन सब कलाकारों के साथ कई बॉलीवुड के नामचीन चेहरे भी झरीया में कई दिनों तक रहे थे और फिर यह फ़िल्म 9 अगस्त 1979 को देश भर में रिलीज हुई थी। फ़िल्म में खदान हादसे में अधिकारियों की लापरवाही को प्रमुखता के साथ दर्शया गया था।