फेल रहा पुलिस का खुफिया तंत्र, पुलिसिया सोंच से दो कदम आगे रहे अपहरणकर्ता

  • अपहरण के आठ दिन बाद अपहरणकर्ताओं ने की युवक की हत्या
  • पुलिसिया कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

वसीम अकरम । साहिबगंज: अपहरण के बाद बोरिओ के अरुण शाह की हत्या ने पुलिसिया व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अपहरणकर्ताओं ने अरुण शाह को 8 दिनों तक अपने कमरे में रखा इस दौरान पुलिस लगातार छापामारी करती रही। हालांकि पुलिस को इस छापामारी में सफलता हासिल नहीं हुई ऐसे में सवाल उठता है की भारी भरकम छापामारी की कवायद के बाद पुलिस को कामयाबी क्यों नहीं मिली? 8 दिनों तक पेशेवर और शातिर अपराधियों ने पुलिस को चकमा दिया और 9वें दिन युवक की लाश उसी इलाके से बरामद हुई जिस इलाके से पुलिस ने युवक की लावारिस मोटरसाइकिल बरामद की थी। मोटरसाइकिल बरामदगी की जगह युवक की लाश मिलने की जगह से लगभग 5 किलोमीटर कि दूर पर अवस्थित है। अनुसन्धान के कर्म में पुलिस ने बाइक बरामद करने के बाद स्थल से बरहेट, तालझारी, तीनपहाड़ के अलावे कई इलाकों में ताबड़तोड़ छापामारी किया। इस दौरान पुलिस की मुठभेड़ बरहेट में अपराधियों से हुई। जिसमें बरहेट थाना प्रभारी घायल हुए वहीं एक एएसआई को गोली भी लग गयी।

सूत्रों की मानें तो पुलिस मोबाइल लोकेशन को छापामारी का आधार बना रही थी। इसका अपराधियों ने जम कर लाभ उठाया और अपहृत को बाइक मिलने के स्थल के करीब ही रख लगातार जगह बदलते हुए पुलिस को भ्रमित करते रहे। पूरे प्रकरण पर नज़र डालें तो क्राइम सीन यही उभर कर आता है कि अपहरणकर्ताओं की दो टीम पूरी वारदात में काम कर रही थी। बरहेट में पुलिस से हुई मुठभेड़ में 3-4 की संख्या में अपराधियों के होने की बात सामने आ रही है। यानि एक गिरोह में जब इतनी संख्या में अपराधी शामिल थे तो अपहृत के पास भी उनकी संख्या कम से कम 5-6 रही होगी। पुलिस के मुठभेड़ के बाद वहां से भागे अपराधियों ने अपहृत के पास मौजूद अपराधियों को अलर्ट कर अपहृत को मौत के घाट उतारने का फरमान जारी कर दिया होगा। ज़ाहिर है पुलिस की बढ़ी हलचल व सतर्कता के बीच बरहेट से उन अपराधियों का बोरियो आना आसान नहीं हुआ होगा। और अपहृत को ठिकाने लगाने का फरमान अपराधियों ने अपने साथी अपराधियों को फोन से ही दिया होगा। ऐसे में सवाल यह खड़ा होता है कि क्या अपहरणकर्ताओं ने बाइक बरामदगी स्थल के आसपास ही अपहृत युवक को बंधक बनाए रखा था औऱ उनका एक गिरोह लगातार पुलिस को चकमा देते हुए स्थल परिवर्तन कर रहा था? अगर ऐसा था तो क्या पुलिस अपराधियों के इस पैंतरे को नहीं पकड़ पायी?

फेल रहा पुलिस का खुफिया तंत्र

पहाड़ी व जंगली इलाकों में हाईटेक व्यवस्था पर ज़्यादा भरोसा करना पुलिस को महंगा पड़ गया। शायद पुलिस ने पारंपरिक खुफिया तंत्र का इस्तेमाल नहीं किया। और अगर किया भी तो उसपर ज़्यादा भरोसा नहीं कर पायी। जिसका नतीजा अरुण की मौत के रूप में सामने आया। अपराधियों ने पुलिस को लागातार उलझाए रखा। लोकेशन बदलते रहे। ताकि पुलिस उसके पीछे लगी रहे। जबकि दूसरी टीम ने इस मौके का फायदा उठा कर अपहृत के परिजनों पर लगातार फिरौती की रकम के लिए दबाब बनाये रखा।

अरुण के अपहरण में कहीं नेशनल संथाल लिब्रेशन आर्मी का हाथ तो नहीं?

ऐसी अटकलें लगायी जा रही हैं कि अरुण के अपहरण में कहीं नेशनल संथाल लिब्रेशन आर्मी का हाथ तो नहीं? हालांकि पुलिस इस बात को बताने से बच रही है और WM 24X7 NEWS भी इस बात की पुष्टि नहीं करता। लेकिन घटनाक्रम व वारदात का पेशेवर तरीका इस बात की तरफ खुल कर इशारे कर रहा है। बीते 7 जून को असम में सक्रिय नेशनल संथाल लिब्रेशन आर्मी का एक सदस्य रोहित मुर्मू बोरियो के रणचरा प्लांट के समीप अपने 2 साथियों के साथ अपराध की योजना बनाते हुए पकड़ा गया था। रोहित मुर्मू पर पिछले दिनों मंडरो स्थित सीटीएस प्लांट पर बमबारी का चार्ज भी था। ऐसे में अरुण साह का अपहरण इस बात की गवाही दे रहा है कि रोहित को जेल से छुड़ाने के लिए उसके गिरोह ने पैसों के इंतज़ाम के लिए अरुण साह का अपहरण किया होगा। हालांकि पुलिस दबिश के चलते अपहरणकर्ता इस मंसूबे में कामयाब नहीं हो सके। जिसके बाद उन्होंने अरुण की हत्या कर दी।

रेणुका मुर्मू, भाजपा नेत्री

मामले पर भाजपा नेत्री रेणुका मुर्मू ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा है कि जब ये हेमंत सरकार सत्ता में आयी है उनके अपने विधानसभा एवं आसपास के इलाके में अपराध बढ़ता जा रहा है। बीते दिनों झारखंड के सुर वीर सिद्धो कान्हू के वंश की ह्त्या की गयी और अब एक व्यवसायी के अपहरण के बाद ह्त्या कर दी गयी। दोनों ही मामलों में पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं। मुख्यमंत्री जब अपने ही विधानसभा एवं आसपास के इलाकों में लोगों की सुरक्षा नहीं सकते तो राज्य में लोगों की सुरक्षा पर तो ग्रहण लगता तय है। वहीं भाजपा नेत्री रेणुका मुर्मू ने पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पुलिस इतने बड़े मामले की छानबीन बिना होम वर्क किये ही कर रही थी। पुलिस की कार्यशैली को देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मानों लीपापोती कर रही हो। जिसका ही परिणाम है कि अरुण साह की हत्या कर दी गयी। पूर्व में भी बरहेट के व्यवसायी मुन्ना भगत के अपहरण में भी पुलिस अपहृत को बरामद नहीं कर पायी थी और अपहरणकर्ताओं उनकी भी हत्या कर दी थी।